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आप के उपयोगकर्ता मूल एडस पसन्द करते हैं पर क्या आप उन्हें सही चीज दे रहे हैं ? 

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स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं से मोबाईल एडस के बारे में पूछिए और वे आपको पूरी बड़ी मोबाईल स्क्रीन पर फूटती चकाचौंध की रूकावट का विवरण देंगे जो उनके द्वारा स्मार्टफोन्स पर की जा रही किसी भी क्रिया में अड़चन उत्पन्न करते हैं। यद्यपि इस तरह के अधिकतर सरलीकरण आपके लिए बड़ी चुनौती होंगे जब आप अपने एप्स का इस लिए मोनेटाइजेशन करेंगे कि उपयोगकर्ता का अनुभव अधिक प्रभावित न हो।

जब रूकावट विहीन एड अनुभव की बात की जाए तो मूल एडस चोटी पर नजर आते हैं। अपनी डिजाइन के आधार पर मूल एडस एप या खेल सामग्री के साथ अटूट रूप से जुड़ जाते हैं। असलियत तो यह है कि वे उस सामग्री का एक हिस्सा बनकर उभरते हैं जिनसे स्मार्टफोन उपयोगकर्ता जुड़े होते हैं। मूल एडस, एप और एड्स की सामग्री के विरोधाभास को घटाते हैं जिससे वे काफी सामयिक और संबद्ध एड अनुभव दे पाते हैं जिसका अधिसंख्य उपयोगकर्ताओं को इंतिजार रहता है।  

असल में, इंडस्ट्री की रिपोर्ट के अनुसार ग्राहक डिस्प्ले एडस की तुलना में 53 प्रतिशत अधिक मूल एडस देखते हैं25% 25 प्रतिशत अधिक ग्राहकों को डिस्प्ले एड इकाई की अपेक्षा  इन फीड मूल एड स्थानपूर्ति ( सर्वाधिक साधारण मूल एड फॉर्मेट ) को देखने के लिए कहा जाता है। 

उदाहरण के लिए जब एप पर समाचार पढ़े जाते हैं यदि उस समय उपयोगकर्ता मूल एड देखते हैं तो अधिक रुचिपूर्वक सामग्री के उस टुकड़े को,जो न्यूज फीड का हिस्सा होता है, को स्वीकारते हैं जो एड, न्यूज आइटम की तरह प्रस्तुत करने हेतु अच्छी तरह डिजाइन की गई हो और न्यूज फीड में आइटम के ही एक हिस्से के रूप में दिखाई देती हो। सच्चाई यह है कि52 प्रतिशत स्मार्टफोन उपयोगकर्ता मूल एडस से जुड़ना पसन्द करते हैं और रेट्स(CTR) द्वारा ही क्लिक करते हैं और बैनर एडस की तुलना में चार गुना अधिक लोग मूल एडस से जुड़ना पसन्द करते हैं। 

जो भी हो, इसका एक दूसरा पक्ष भी है । मूल एडस आपके सामग्री अनुभव के साथ इतनी घनिष्ठता से जुड़े होते हैं कि उपयोगकर्ता अक्सर गलती से उन्हें असल सामग्री समझकर क्लिक करते हैं और बाद में उन्हें पता चलता है कि यह तो विज्ञापन है । इस तरह के  अनचाहे क्लिक्स से बचने और विज्ञापनदाता के रूप में अपनी साख बचाने के लिए यहाँ तीन मार्गदर्शक सुझाव हैं जो मूल एडस अधिकारों की प्राप्ति हेतु सहायक हैं।  

  1. 1.IAB का सुझाव है कि सभी मूल एडस साफ़ साफ़ ‘विज्ञापन’ या ‘ प्रमोशन ‘ या ‘ स्पोंसर्ड’ या ‘ एड’ या ‘स्पोंसर्ड कॉन्टेंट ‘लिखे हुए होने चाहिए जो इस बात पर निर्भर हो कि मूल एड का स्वरुप क्या है। प्रकाशक को सुनिश्चित करना चाहिए कि विज्ञापन दाता का मार्का संकेतक ( ब्रांड लोगो ) एड सामग्री में किसी स्थान पर साफ़ साफ़ दिखना चाहिए । जिससे तुरंत जुड़ाव और वापस बुलाना स्थापित हो सके। यह आपसी विश्वास को भी पुष्ट करता है, यह सत्य है कि इंडस्ट्री रिपोर्ट्स सुझाव देते हैं कि इस प्रचार की पारदर्शिता से CTR में 15 प्रतिशत की वृद्धि, मार्का सजगता के 84 प्रतिशत के निकट और खरीदी उद्देश्य में 74 प्रतिशत वृद्धि करता है।
  2. 2. एड इकाई की नियुक्ति ऐसी होनी चाहिए जो आसानी से खोजी जा सके । मूल एडस इकाइयों को होम पेज पर रखे जाने से 55 प्रतिशत ऊंचा CTR प्राप्त होता है ऐसा अनुमान है। यहाँ तक कि, सेक्शन पेज पर रखे जाने की तुलना में सामग्री में रखे जाने पर वे बेहतर प्रदर्शन करते हैं। कॉन्टेंट फीड्स के मामले में, इंडस्ट्री बॉडी MMA के सुझावानुसार मूल एड को मुख्य पेज के ऊपर मुड़ी हुई अवस्था में प्रस्तुत करना चाहिए और इसे लगभग (5- 6) टाइल्स के बाद दोहराना चाहिए।
  3. एप प्रकाशकों को अपने भाव भी विषयवस्तु और ग्राहकों के बर्ताव के आधार पर ठीक करते रहने चाहिए। जब मूल एड धारा में स्क्रोल पद्धति में आ रहे हों तब भावों को सुधारने की गुंजाइश औसत सत्र समय पर निर्भर होती है। यह ग्राहक को उस फीड के अंत से फिर स्क्रोल करके वापस लौटने की सुविधा देता है।  

जब तक मूल एड आपको अपने विज्ञापन अनुभव में तल्लीनतापूर्वक डुबाये रखने की सुनिश्चितता देता है यह तय है कि आप इन सर्वश्रेष्ठ उपायों का अभ्यास जारी रखेंगे जब तक कि आप अपेक्षित परिणाम नहीं पा जाते। 

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